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सफर

Posted On: 7 Dec, 2011 में

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जिंदगी,
बस इत्तफाक तो नहीं
एक संघर्ष का प्लेटफार्म है
जहां मिलते हैं
तमाम जाने-अनजाने लोग
एक बड़े सफर पर जाने के लिए
उनमें से कुछ
बन जाते हैं हमसफर
….
इन हमसफरों में भी कुछ
होते हैं बेवफा
जो किसी न किसी स्टेशन पर
छोड़ जाते हैं साथ
सबसे कठिन है
उन्हें पहचानना
जो बीच में ही चल देंगे
हमें सोता समझ कर
….
इस सफर में
हमें ढूंढ़ने होते हैं
कुछ सच्चे कुछ अपने
जो साथ चलें हर कदम पर
और कहें
नहीं है घबराने की कोई वजह
अंधेरे भरे हर मोड़ पर
उनका उजाला जो है

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31 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Maharathi के द्वारा
May 6, 2015

डा मिश्राजी संजीव क्या खूब लिखते हो बड़ा सुन्दर लिखते हो और लिखो और लिखो अच्छा लगता है प्लेटफार्म से तुलना करना अच्छा लगता है।।

rahul के द्वारा
March 31, 2014

इन हमसफरों में भी कुछ होते हैं बेवफा जो किसी न किसी स्टेशन पर छोड़ जाते हैं साथ

yamunapathak के द्वारा
July 15, 2012

हल्लो सर आपकी कविता की अंतिम पंक्ति मन को छूती है.और सच कहूँ तो समस्त सार इन्ही में सिमट गया है. कुछ सच्चे कुछ अपने जो साथ चलें हर कदम पर और कहें नहीं है घबराने की कोई वजह अंधेरे भरे हर मोड़ पर उनका उजाला जो है

Mohinder Kumar के द्वारा
April 30, 2012

संजीव जी, सुन्दर मनोभाव लिये रचना. जब जिन्दगी को सफ़र समझ ही लिया जाते तो फ़िर मिलने और बिछडने की चिन्ता से ऊपर उठ जाना ही अच्छा है, वर्ना खुशी के लिये जीवन में बहुत कम समय बचेगा.

follyofawiseman के द्वारा
April 4, 2012

ज़िंदगी के ट्रेन मे कुछ ऐसे भी हमसफर होते हैं ,  जो छोटे से चुनौटी मे दुखो का खैनी ढोते हैं और चबा कर थूकते हैं खैनी इधर-उधर कहीं भी,  कुछ लोग इस कदर बदतमीज़ होते हैं,

cb Singh के द्वारा
January 30, 2012

बहुत खूब कहा है | http://www.hindisahitya.org पर अपनी कवितायें प्रकाशित करें |

kiranarya के द्वारा
December 20, 2011

संजीव जी नमस्कार, जीवन का सफ़र कुछ ऐसा ही है, इस सफ़र में जब अपना कहने वाले साथ छोड़ जाते है अचानक तो बहुत दुःख होता है, लेकिन ऐसे अनुभवों से सबक ले आगे बढ़ना ही जिंदगी है……….सुंदर भाव……….

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    December 20, 2011

    सच कहा किरन जी…. जिंदगी सबक देते-देते ही आगे बढ़ती जाती है

surendra के द्वारा
December 16, 2011

वाह ……वाह…..

siyabihari sharma के द्वारा
December 14, 2011

कर दिया कुर्बान खुद को , हमने वफ़ा के नाम पर …. छोड़ गए वो हमको अकेला मजबूरियों के नाम पर ….

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    December 20, 2011

    धन्यवाद सियाबिहारी जी, इतनी अच्छी पंक्तियों के लिए

    siyabihari sharma के द्वारा
    December 22, 2011

    thanks bhaiya

siyabihari sharma के द्वारा
December 13, 2011

कुछ साथ में चलते रहे कुछ बीच ही से फिर गए………..

कुलदीप के द्वारा
December 13, 2011

मैंने इस कविता को अति उत्तम पाया है।

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    December 14, 2011

    बहुत धन्यवाद कुलदीप जी

praveen tiwari 'raunak' के द्वारा
December 12, 2011

सर नमस्कार, सुन्दर रचना….हमारे जीवन से कब कौन किस बहाने से दूर हो जाये कुछ कहा नहीं जा सकता……बधाई आपको

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    December 12, 2011

    धन्यवाद प्रवीन जी

    anwar के द्वारा
    January 17, 2012

    this sentence is very nice for me

राजू मिश्र के द्वारा
December 8, 2011

…. ऐसे मुसाफिरों की पहचान पहले ही कर लेना जरूरी है जो सोता समझ कर निकल लेते हैं।

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    December 9, 2011

    सच है… पर पहचान हो कहां पाती है

Manish Sachan के द्वारा
December 7, 2011

बहुत उम्‍दा सर, अच्‍छा लगा पढ कर

Umesh Mohan Dhawan के द्वारा
December 7, 2011

सच्चे हमसफर भी मिलते हैं पर बहुत कम और उन्हें पहचानना पड़ता है. बहुत उम्दा रचना . बहुत सुंदर. उमश मोहन धवन कानपुर

Divya के द्वारा
December 7, 2011

Nice one to read…Loved the last lines नहीं है घबराने की कोई वजह, अंधेरे भरे हर मोड़ पर उनका उजाला जो है!

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    December 7, 2011

    धन्यवाद दिव्या जी…. पॉजिटिविटी ही तो जिंदगी का मूल तत्व है

Divya के द्वारा
December 7, 2011

A nice one to read :) Loved the last lines नहीं है घबराने की कोई वजह, अंधेरे भरे हर मोड़ पर, उनका उजाला जो है!

sushil के द्वारा
December 7, 2011

अच्छा है . सच है कि जो हमें सोता छोड़ कर चले जायेंगे उन्हें हम क्या जान पायेंगे पर वह जरूर याद आयेंगे. 


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