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दर्द

Posted On: 16 Jun, 2011 में

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हां, देखा है मैंने दर्द..
जब कोई अचानक पास आकर
हो जाता है दूर
तब होता है दर्द

जब
कोई बहुत खास होने का दावा कर
नहीं रह जाता है आम
तब होता है दर्द

जब
किसी के बहुत पास होकर भी
सताता है दूर होने का गम
तब होता है दर्द

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59 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shwetamisra के द्वारा
February 6, 2013

बखूबी लिखा है दर्द को आपने ………….

yamunapathak के द्वारा
July 15, 2012

बहुत सुन्दर भाव हैं.और बड़े शिद्दत से एहसास भी किये जाते हैं. मैं भी अपने प्रियजन के दूर हो जाने की कल्पना से ही भयभीत हो जाती हूँ. हम में से ज्यादा तर लोग इसी भय में अपनी ज़िंदगी निकाल देते हैं. धन्यवाद सर

Mohinder Kumar के द्वारा
April 24, 2012

मिश्रा जी, सुन्दर भावाव्यक्ति है. परन्तु जीवन के आभाव व्यक्ति को या तो कमजोर बना देते है या फ़िर इतना कठोर की वह हर बाधा पार कर जाता है. किंचित जीवन के लिये यह आवश्यक है कि कुछ न कुछ कमी रहें.

अलीन के द्वारा
February 2, 2012

संजय जी, दर्द को वयां करती एक खुबसूरत रचना… “अख़बार की सुर्ख़ियों से ” पढना न भूले. आशा करता हूँ लेख पसंद आएगा.

induravisinghj के द्वारा
January 30, 2012

कोई बहुत खास होने का दावा कर नहीं रह जाता है आम तब होता है दर्द गहन विषय पर सरलता से प्रस्तुतिकरण।

kiranarya के द्वारा
December 20, 2011

दर्द के भी अपने पैमाने है, इसमें अपने भी लगते बेगाने है, कभी जीने का सबब बन जाता है दर्द, तो कभी घाव की रिसन बन जाता है दर्द, कुछ दर्द जिंदगी की तरह होते है, ताउम्र हमसाये मानिंद साथ निभाते है, जां के साथ ही जहान से जाते है……….किरण आर्य

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    December 20, 2011

    गजब…. बहुत अच्छा लिखा किरण जी

kiranarya के द्वारा
December 12, 2011

नमस्कार संजीव जी दर्द को परिभाषित करती एक बेहतरीन अभिव्यक्ति……….हार्दिक शुभकामनाये…….

kapil के द्वारा
September 22, 2011

मुस्कुराहट दे मेरे चहेरे को जब वो रूठ जाते है तो होता है दर्द पकड़कर दामन हमारा जब वो कहते है की भूल जाओ हमको तो होता है दर्द जिंदगी के खेल में शायद यही होता है दर्द….. कभी होता था किसी का साथ अपना पर आज नहीं है ये सोचकर होता है दर्द जिसको हमसफ़र सोच कर रहो पर चलते थे उसे आज बेगैरत देख होता है दर्द जिंदगी के खेल में शायद यही होता है दर्द……. किसी की ख़ुशी में ख़ुशी ढूंढते हुए जब उसी से पाते है गम तो होता है दर्द दे जिसका साथ सचाई से गर वही करे फरेब तो होता है दर्द जिंदगी के खेल में शायद यही होता है दर्द…… to be continued ………………………..

Lahar के द्वारा
September 4, 2011

आदरणीय संजीव जी सप्रेम नमस्कार , आपके इस रचना ने कविता में दर्द का एहसास कराया है | आपकी इस रचना के लिए आपको बहुत – बहुत बधाई |

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    September 4, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद लहर जी, आपका स्नेह मुझे और भी लिखने को प्रेरित करेगा।

sg22 के द्वारा
August 28, 2011

आदरणीय संजीवजी, नमस्कार, बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ,या यूँ कहे की दर्द का दूसरा नाम ही कविता है तो अतिशयोक्ति न होगी. आपका आभार .

kanchan chhatrashali के द्वारा
July 11, 2011

आदरनीय सर जी एक अचछी कविता के लिए बधाई ! आपकी कविता जीवन की वास्तविकता को बयां करती हे शायद दर्द जीवन में हमेशा यादो के रूप में मह्फुस रहता हे धन्यवाद

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    July 11, 2011

    धन्यवाद कंचन जी…आप सबका उत्साहवर्द्धन रचनाधर्मिता को आगे बढ़ाता है। 

vijay tripathi के द्वारा
July 5, 2011

sargarbhit evam gambheer rachna. dhnyawad.

shahpat के द्वारा
June 30, 2011

दर्द-इ-दिल के वास्ते पैदा किया इंसान को …..सच्चाई ये है कि ज़िन्दगी में दर्द न हो तो ये बहुत फीकी-फीकी सी हो जाएगी…आपने अच्छा लिखा है.

abodhbaalak के द्वारा
June 28, 2011

बहुत सुन्दर, आपके दर्द ने तो एक दर्द सा जगा ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Dr. Mohan Tiwary के द्वारा
June 28, 2011

…आपकी दर्द भरी दस्ता मेरे दर्दे दिल की दावा बन गयी .कोतिसः धन्यवाद ….. ये जिदगी है आंधियो के दौर का तिनका मुस्किल यहाँ सुख भोगना ठाहराव के दिन का इसका पता किसको किधर मुर जाये कब रहे किस ठौर पे ठोकर मिले किस तौर गल बहे

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 28, 2011

    धन्यवाद डॉक्टर साहब, आंधियों के दौर के बाद भी ठौर तो मिल ही जाता है

    kumar ajay के द्वारा
    August 30, 2011

    न मिल पाना गुनहा 

sanjoy sachdev, chairman, love commandos के द्वारा
June 28, 2011

A great expression and feeling. Your words and mission is keeping the youth of the nation with the nation and rather stopping them from elienating from national main stream. Our salutations to the Jagran family. Thanks

Dr HARSHVARDHAN TRIVEDI के द्वारा
June 27, 2011

जब कोई अपना ही मिलता है अनजाने मुखोटे में तब दर्द होता है . दर्द के लिए दिल का होना आवश्यक है . अब दुनिया लागे है ऐसी – चुपके से देख लिया था वो जाना पहचाना चेहरा जिसके ऊपर इश्तिहार से जड़े चेहरे थे कई . फिर मिलेंगे . हर्ष

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 27, 2011

    क्या बात है हर्ष जी, इन मुखौटों को हटाने के बाद भी बढ़ ही जाता है दर्द

roshni के द्वारा
June 26, 2011

संजय जी बहुत ही अच्छी रचना … क्या कहे किन शब्दों में तारीफ करू दर्द के आगे तो सब शब्द कम है .. बहुत बढ़िया

Piyush Ranjan के द्वारा
June 22, 2011

Sanjeev ! Ek achchi abhivyakti. Ram Krishna Mission ka samaj ko samvedansheel vyakti pradan karne me yogdan abhootpurva hai. Is me MISSION ki hawa ki khushboo hai .

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 22, 2011

    धन्यवाद भाई…. रामकृष्ण मिशन स्कूल संस्कारों की पाठशाला भी तो है

sdtiwari के द्वारा
June 22, 2011

दर्द के तीन स्वरुप – बहुत अच्छी तरह बताने में सफल रहे हैं मिश्रा जी

shikhar bhatnagar के द्वारा
June 22, 2011

i agree vid u n m understand kab hota hai dard really its a nice creation and very nice poetry awesome sir b continue n 1 thg m 4get 2 say WHA_WHA bhaut khub

ajay के द्वारा
June 21, 2011

भाई जी जहां तक मेरी समझ है इस प्रकार के दर्द की एक उम्र होती है और आप उसे पार कर चुके हैं, अब भी अगर आपको ऐसा दर्द होता है तो खुदा खैर करे

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 21, 2011

    दर्द की उम्र वाली बात तर्कसंगत है…

    shikhar bhatnagar के द्वारा
    June 22, 2011

    super like

alpana mishra के द्वारा
June 17, 2011

दर्द तो कई रंगों में बसा है, लम्हा लम्हा सभी के साथ चला है. इंसान को हर पल किया है लाचार, चाहे वो नफरत हो या हो प्यार.

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 17, 2011

    कवि मन मुखर हुआ, अल्पना की कल्पना में… वाह!!!!!!!!!!!!!!!!!

Zafar Irshad के द्वारा
June 17, 2011

हां, देखा है मैंने दर्द.. जब कोई अचानक पास आकर हो जाता है दूर तब होता है दर्द bahut hi shandar abhivyakti…dil ki gahraiyon se nikli aam aadmi ki aawaz jiske paas dil hai…Keep it Up Sanjeev…

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 17, 2011

    धन्यवाद जफर भाई… दिल तो आखिर दिल है… दिल का क्या है?????

डॉ.मनोज चतुर्वेदी के द्वारा
June 17, 2011

प्रियभाई डॉ. संजीव, अत्यंत संवेदनात्मक अभिव्यक्ति…. “किसी के बहुत पास होकर भी सताता है दूर होने का गम तब होता है दर्द” “जय हिंद,जय हिंदी”

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 17, 2011

    धन्यवाद डॉ.चतुर्वेदी….ऐसी पंक्तियां निश्चित रूप से मनोबल बढ़ाती हैं। 

    vikash के द्वारा
    June 17, 2011

    पग

मृगांक पाण्डेय के द्वारा
June 17, 2011

वाकई दिल का दर्द दिल से सर्च किया है…बयां किया है। सर्च और रिसर्च का यह क्रम जारी रखिए। दिल से बयां दिल के दर्द पर आपको बधाई-दिल से।

    Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 17, 2011

    धन्यवाद भाई….आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा। 

राजू मिश्र के द्वारा
June 16, 2011

बहुत खूब लिखी है कविता…..सताता है दूर होने का गम तब होता है दर्द….वाह-वाह क्‍या बात है। जय हो।

    Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 17, 2011

    धन्यवाद राजू जी, आपका स्नेह इसी तरह प्रेरित करता रहेगा

dheeerendra के द्वारा
June 16, 2011

बहुत अाछी है …..

    Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 17, 2011

    धन्यवाद धीरेंद्र, परदेस में रहकर भी देस पढ़ने का समय निकाल लेते हो…. बहुत खूब

नवीन कुमार पाठक के द्वारा
June 16, 2011

बेदर्द दर्द और सर्द यारियाँ हुईं जब कभी भी हम मिले गर्द्बारियां हुईं तुमसे गले मिले तो ज़माने नहीं हुए दिल मिलने में किसलिए दुश्वारियां हुईं |

    Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 17, 2011

    गजब लिखा… ऐसी प्रतिक्रिया ही उत्साहित करती है

ashutosh के द्वारा
June 16, 2011

आज बिसराकर तुम्हें कितना दुखी मन यह कहा जाता नहीं है। मौन रहना चाहता, पर बिन कहे भी अब रहा जाता नहीं है। दर्द सीने में है और तड़प दिल में, आंखों की बेचैनी को सहा जाता नहीं है पास रहकर भी तुम दूर क्यों हो मेरे मन के मीत, अब लौट आओ कि बिरह सहा जाता नहीं है।

    Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
    June 17, 2011

    बिरह सहना कौन चाहता है… वह तो सहना पड़ता है


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